नारायण बलि पूजा उन आत्माओं की शांति हेतु संपन्न की जाती है जिनकी मृत्यु दुर्घटना, आत्महत्या, डूबने, अग्निकांड अथवा किसी अन्य अकाल कारण से हुई हो। ऐसी आत्माएं सामान्य श्राद्ध कर्म से तृप्त नहीं होतीं और प्रेतयोनि में भटकती रहती हैं।
इस विशेष अनुष्ठान में भगवान नारायण की पूजा सहित बलि विधान संपन्न कर आत्मा को प्रेत योनि से मुक्ति दिलाई जाती है तथा उसे मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर किया जाता है।
गया जी की प्रेतशिला पहाड़ी को अकाल मृत्यु प्राप्त आत्माओं की मुक्ति हेतु सर्वाधिक पावन स्थान माना गया है। यहां भगवान विष्णु के नारायण स्वरूप की पूजा कर बलि अर्पण करने से आत्मा को शीघ्र शांति एवं मुक्ति प्राप्त होती है।
शास्त्रों में वर्णित है कि प्रेतशिला पर संपन्न नारायण बलि पूजा से परिवार भी उस आत्मा से जुड़े नकारात्मक प्रभावों से मुक्त होता है और घर में सुख-शांति लौट आती है।
दिवंगत आत्मा के नाम एवं मृत्यु के कारण सहित संकल्प लिया जाता है।
भगवान नारायण की विशेष पूजा-अर्चना एवं मंत्र जाप किया जाता है।
शास्त्रोक्त विधि से बलि अर्पण कर आत्मा को मुक्ति दिलाई जाती है।
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