तर्पण पितरों, देवताओं एवं ऋषियों को जल, काले तिल एवं कुश (पवित्र घास) के माध्यम से तृप्त करने की वैदिक विधि है। "तर्पण" शब्द का अर्थ ही है — तृप्त करना।
गया जी में फल्गु नदी के पावन तट पर संपन्न होने वाला तर्पण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह नदी स्वयं पितृ तर्पण हेतु सिद्ध एवं पवित्र मानी गई है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार फल्गु नदी को माता सीता का आशीर्वाद प्राप्त है, जिन्होंने भगवान राम की अनुपस्थिति में स्वयं इसी नदी के तट पर राजा दशरथ का तर्पण संपन्न किया था। तभी से यह नदी पितृ तर्पण हेतु सर्वाधिक पवित्र मानी जाती है।
यहां किया गया तर्पण पितरों को तत्काल तृप्ति प्रदान करता है तथा परिवार को पितृ दोष एवं संबंधित बाधाओं से राहत दिलाता है।
पितरों के नाम एवं गोत्र सहित तर्पण हेतु संकल्प लिया जाता है।
फल्गु नदी में स्नान कर शुद्धि प्राप्त की जाती है।
कुश एवं तिल सहित पितरों को क्रमवार जल तर्पण अर्पित किया जाता है।
हमारी टीम से सीधे बात करें और गया जी में पूर्ण श्रद्धा के साथ पूजा संपन्न करवाएं