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गया जी में संपूर्ण पूजा सेवाएं

पितरों की मुक्ति एवं परिवार की सुख-समृद्धि हेतु वैदिक रीति से संपन्न कराई जाने वाली सभी प्रमुख पूजाएं

पिंड दान पूजा ₹4,100

पिंड दान पूजा

पूर्वजों को पिंड अर्पण कर पितृ ऋण से मुक्ति एवं आत्मा की शांति हेतु मुख्य वैदिक अनुष्ठान।

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पितृ दोष निवारण पूजा ₹11,000

पितृ दोष निवारण पूजा

कुंडली में पितृ दोष के दुष्प्रभावों को शांत कर पारिवारिक बाधाओं से मुक्ति।

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नारायण बलि पूजा ₹9,100

नारायण बलि पूजा

अकाल मृत्यु प्राप्त पूर्वजों की आत्मा की शांति हेतु विशेष वैदिक कर्मकांड।

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त्रिपिंडी श्राद्ध ₹8,100

त्रिपिंडी श्राद्ध

तीन पीढ़ियों के पितरों की तृप्ति एवं मोक्ष हेतु विशेष श्राद्ध विधि।

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रुद्राभिषेक ₹5,100

रुद्राभिषेक

भगवान शिव की कृपा एवं पारिवारिक कल्याण हेतु रुद्राभिषेक अनुष्ठान।

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तर्पण पूजा सेवा ₹11,000

तर्पण पूजा सेवा

फल्गु नदी तट पर जल अर्पण कर पितरों को तृप्त करने की पावन विधि।

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श्राद्ध (गया जी) ₹5,100

श्राद्ध (गया जी)

पितृ पक्ष एवं वार्षिक श्राद्ध हेतु गया जी में संपूर्ण विधि-विधान।

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Welcome to Gaya Dham
गया धाम में आपका स्वागत है

मोक्ष भूमि गया जी — पितरों की मुक्ति का पावन धाम

बिहार राज्य में स्थित गया जी भारत के सबसे पवित्र एवं प्राचीन तीर्थ स्थलों में से एक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार स्वयं भगवान विष्णु ने गयासुर राक्षस को वरदान दिया था कि जो भी व्यक्ति गया जी आकर अपने पूर्वजों का पिंड दान एवं श्राद्ध कर्म करेगा, उसके पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होगी।

यही कारण है कि प्रतिवर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु अपने दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी एवं पूर्वजों की आत्मा की शांति हेतु गया जी आते हैं। यहां फल्गु नदी के तट पर, विष्णुपद मंदिर परिसर में तथा अक्षयवट के नीचे किया गया पिंड दान अक्षय फल देने वाला माना जाता है।

  • धार्मिक ग्रंथों में वर्णित एकमात्र पिंड दान स्थल
  • विष्णुपद मंदिर, फल्गु नदी एवं अक्षयवट का पावन संगम
  • अनुभवी गयावाल पंडितों द्वारा शास्त्रोक्त विधि-विधान
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Why Pind Daan is performed in Gaya
गया जी में ही क्यों?

गया जी में पिंड दान क्यों किया जाता है?

गरुड़ पुराण एवं वायु पुराण सहित अनेक धर्मग्रंथों में गया जी को पितृ मोक्ष हेतु सर्वश्रेष्ठ स्थान बताया गया है। मान्यता है कि गया जी में किया गया श्राद्ध कर्म भारत के किसी भी अन्य तीर्थ स्थल की तुलना में अधिक फलदायी एवं स्थायी होता है — क्योंकि यहां स्वयं भगवान विष्णु के चरण (विष्णुपद) स्थित हैं।

यहां पिंड दान करने से पितरों को तीन पीढ़ियों तक तृप्ति मिलती है और परिवार पितृ ऋण से मुक्त होता है। इसीलिए हिन्दू धर्म में यह मान्यता है कि जीवन में एक बार गया जी आकर पूर्वजों के लिए पिंड दान अवश्य करना चाहिए, चाहे अन्य किसी तीर्थ पर श्राद्ध किया गया हो या नहीं।

शास्त्र सम्मतगरुड़ पुराण में वर्णित विधि
अक्षय फलतीन पीढ़ियों तक तृप्ति
परिभाषा एवं महत्व

पिंड दान क्या है?

पिंड दान एक प्राचीन वैदिक अनुष्ठान है जिसमें दिवंगत पूर्वजों को चावल, जौ का आटा, तिल एवं शहद से बने "पिंड" अर्पित किए जाते हैं

पिंड का अर्थ

चावल, जौ का आटा, काला तिल, शहद एवं शुद्ध घी से बनाया गया गोला जो पूर्वजों के प्रतीक स्वरूप अर्पित किया जाता है।

मंत्रोच्चार सहित विधि

वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ संकल्प लेकर, स्नान-शुद्धि के पश्चात पंडित जी के मार्गदर्शन में पिंड अर्पण किया जाता है।

पितृ ऋण से मुक्ति

शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति पर तीन ऋण होते हैं — देव ऋण, ऋषि ऋण एवं पितृ ऋण। पिंड दान से पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है।

पौराणिक कथा

गयासुर की पावन कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार गयासुर नामक एक अत्यंत पवित्र असुर था, जिसके शरीर के स्पर्श मात्र से पापी भी मोक्ष प्राप्त कर लेते थे। इससे स्वर्ग में हाहाकार मच गया क्योंकि पापी लोग भी बिना कर्मफल भोगे मोक्ष पाने लगे।

देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने गयासुर से यज्ञ हेतु अपना शरीर स्थिर रखने का वचन मांगा। गयासुर की देह इतनी विशाल थी कि उस पर देवताओं ने यज्ञ संपन्न किया और अंत में भगवान विष्णु ने अपने चरण उसके सिर पर रखकर उसे सदा के लिए वहीं स्थिर कर दिया — यही स्थान आज "विष्णुपद मंदिर" के नाम से प्रसिद्ध है।

गयासुर ने अंतिम इच्छा के रूप में यह वरदान मांगा कि जो भी व्यक्ति इस पावन भूमि पर अपने पूर्वजों का पिंड दान करेगा, उसके पितरों को अवश्य मोक्ष प्राप्त होगा। भगवान विष्णु के इसी वरदान के कारण गया जी आज संपूर्ण विश्व में पितृ मोक्ष का सबसे पवित्र स्थल माना जाता है।

Gayasur Legend
पावन स्थल

गया जी के प्रमुख धार्मिक स्थल

पिंड दान एवं श्राद्ध कर्म हेतु गया जी के यह छह स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण एवं पवित्र माने जाते हैं

विष्णुपद मंदिर

भगवान विष्णु के पावन चरण चिन्ह स्थित इस मंदिर में मुख्य पिंड दान अनुष्ठान संपन्न होता है।

फल्गु नदी

तर्पण एवं जलांजलि हेतु पवित्र फल्गु नदी का तट, जहां पूर्वजों को जल अर्पित किया जाता है।

अक्षयवट

अमरत्व का प्रतीक यह वट वृक्ष, जहां किया गया पिंड दान अक्षय एवं शाश्वत फल प्रदान करता है।

प्रेतशिला पहाड़ी

अकाल मृत्यु प्राप्त आत्माओं की शांति हेतु नारायण बलि पूजा इसी पावन पहाड़ी पर संपन्न होती है।

रामशिला पहाड़ी

मान्यता अनुसार भगवान श्रीराम ने स्वयं यहां अपने पिता दशरथ का श्राद्ध कर्म संपन्न किया था।

पितामहेश्वर धाम

पितरों के देवता भगवान शिव के इस मंदिर में विशेष रुद्राभिषेक एवं पूजा-अर्चना की जाती है।

Pt. Prasant Bhaiya
15+ वर्षों का अनुभव
आपके मार्गदर्शक

पं. प्रशांत भैया — अनुभवी गयावाल पंडित

हर श्रद्धालु के लिए गया जी की यात्रा एक भावनात्मक एवं आध्यात्मिक अनुभव है — हमारा प्रयास है कि प्रत्येक अनुष्ठान पूर्ण श्रद्धा, शुद्धता एवं शास्त्रोक्त विधि से संपन्न हो।

पं. प्रशांत भैया गया जी के परंपरागत गयावाल पंडित परिवार से हैं तथा विगत 15 वर्षों से देश-विदेश के श्रद्धालुओं को पिंड दान, श्राद्ध, तर्पण एवं पितृ दोष निवारण पूजा में मार्गदर्शन दे रहे हैं। विष्णुपद मंदिर के निकट स्थित होने के कारण वे प्रत्येक यजमान को व्यक्तिगत ध्यान एवं संपूर्ण व्यवस्था के साथ पूजा संपन्न कराते हैं।

  • पारंपरिक गयावाल पंडित परिवार से संबंध
  • हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं में मार्गदर्शन
  • NRI एवं विदेशी श्रद्धालुओं हेतु विशेष सहयोग
  • पूजा सामग्री एवं ठहरने की व्यवस्था में सहायता
पूजा विधि

पिंड दान की संपूर्ण प्रक्रिया

गया जी में पिंड दान पांच मुख्य चरणों में संपन्न किया जाता है

1

संकल्प

पूजा प्रारंभ करने से पूर्व यजमान द्वारा पवित्र संकल्प लिया जाता है।

2

स्नान एवं शुद्धि

फल्गु नदी में स्नान कर तन-मन की पवित्रता प्राप्त की जाती है।

3

पिंड अर्पण

मंत्रोच्चार सहित पूर्वजों को पिंड अर्पित किए जाते हैं।

4

तर्पण

पितरों की तृप्ति हेतु जल एवं तिल से तर्पण किया जाता है।

5

ब्राह्मण भोज एवं दान

ब्राह्मण भोजन एवं यथाशक्ति दान-पुण्य के साथ पूजा संपन्न होती है।

श्रद्धालुओं के अनुभव

हमारे यजमानों की प्रतिक्रिया

"प्रशांत भैया ने हमारे पिताजी का पिंड दान अत्यंत श्रद्धा एवं पूर्ण विधि-विधान से करवाया। पूरी प्रक्रिया सरल तरीके से समझाई गई, हम बहुत संतुष्ट हैं।"

राकेश शर्मा
राकेश शर्मादिल्ली

"विदेश में रहते हुए भी WhatsApp के माध्यम से पूरी बुकिंग एवं मार्गदर्शन मिल गया। ठहरने से लेकर पूजा सामग्री तक सब व्यवस्था उन्होंने ही करवाई।"

अनीता कुमारी
अनीता कुमारीयू.एस.ए.

"पितृ दोष निवारण पूजा के बाद परिवार में सुख-शांति महसूस हो रही है। पंडित जी का व्यवहार अत्यंत सरल एवं आत्मीय रहा।"

सुरेश मिश्रा
सुरेश मिश्रापटना, बिहार
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आपके सवाल, हमारे जवाब

पिंड दान वर्ष के किसी भी दिन किया जा सकता है, परंतु पितृ पक्ष (आश्विन मास के कृष्ण पक्ष) के दौरान इसका विशेष महत्व माना जाता है। इसके अतिरिक्त परिजन की मृत्यु तिथि या किसी भी शुभ मुहूर्त पर भी यह अनुष्ठान संपन्न किया जा सकता है।

सामान्यतः पिंड दान पूजा 2 से 3 घंटे में संपन्न हो जाती है, जबकि पूर्ण श्राद्ध कर्म विधि के अनुसार 1 से 3 दिन तक चल सकता है। बुकिंग के समय आपको संपूर्ण समय-सारणी की जानकारी दे दी जाती है।

जी हां, हम NRI एवं विदेशी श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधा प्रदान करते हैं। आप WhatsApp Video Call के माध्यम से पूरी पूजा लाइव देख सकते हैं, अथवा अपने किसी प्रतिनिधि के माध्यम से भी पूजा संपन्न करवा सकते हैं।

पूजा शुल्क में पंडित जी की सेवा, आवश्यक पूजन सामग्री, संकल्प एवं मंत्रोच्चार शामिल हैं। ठहरने, भोजन एवं वाहन जैसी अतिरिक्त सेवाओं की व्यवस्था अनुरोध पर अलग से करवाई जा सकती है।

श्राद्ध एक व्यापक अनुष्ठान है जिसमें प्रार्थना, तर्पण एवं ब्राह्मण भोज सम्मिलित हैं, जबकि पिंड दान विशेष रूप से पूर्वजों को "पिंड" अर्पित करने की क्रिया है। पिंड दान श्राद्ध कर्म का ही एक महत्वपूर्ण भाग है।

तिथि सुनिश्चित करने हेतु WhatsApp पर संपर्क कर बुकिंग की पुष्टि करना उचित रहता है। भुगतान की जानकारी बुकिंग के समय पंडित जी से सीधे साझा की जाती है।

दिवंगत परिजन का नाम, गोत्र (यदि ज्ञात हो), मृत्यु तिथि एवं यजमान का नाम बताना पर्याप्त होता है। गोत्र ज्ञात न होने पर भी पूजा शास्त्रोक्त वैकल्पिक विधि से संपन्न कराई जा सकती है।

हमारी टीम धर्मशाला/होटल में ठहरने, स्थानीय वाहन व्यवस्था एवं गया जी के अन्य पावन स्थलों के दर्शन में भी पूर्ण सहयोग करती है। आप बुकिंग के समय अपनी आवश्यकता बता सकते हैं।
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तिथि निश्चित करने, पूजा सामग्री की जानकारी या किसी भी प्रश्न हेतु हमसे सीधे संपर्क करें — हमारी टीम हर कदम पर आपके साथ है।

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+91 98525 24877
पता

विष्णुपद मंदिर के पास, करसिल्ली मोहल्ला, ग्वालियर भवन के बगल में, गया, बिहार – 823003

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