त्रिपिंडी श्राद्ध एक विशेष एवं व्यापक श्राद्ध विधि है जिसमें पिता, दादा एवं परदादा — इन तीन पीढ़ियों के पितरों (तथा माता पक्ष की तीन पीढ़ियों) के लिए एक साथ पिंड दान एवं तर्पण किया जाता है।
यह अनुष्ठान विशेष रूप से तब करवाया जाता है जब परिवार में कई वर्षों से नियमित श्राद्ध न हुआ हो अथवा पितरों की तृप्ति में किसी प्रकार की कमी महसूस हो रही हो।
शास्त्रों के अनुसार यदि किसी परिवार में कई पीढ़ियों तक श्राद्ध कर्म ठीक से न हुआ हो, तो पितृ अतृप्त रहते हैं जिसका प्रभाव परिवार की उन्नति एवं सुख-शांति पर पड़ता है। त्रिपिंडी श्राद्ध एक साथ तीन पीढ़ियों को तृप्त कर इस कमी को पूर्ण करता है।
गया जी में यह विशेष श्राद्ध विधि सर्वाधिक फलदायी मानी जाती है क्योंकि यहां किया गया अनुष्ठान संपूर्ण वंश परंपरा के पितरों तक पहुंचता है।
परिवार की तीन पीढ़ियों के नाम सहित विस्तृत संकल्प लिया जाता है।
तीनों पीढ़ियों के लिए क्रमशः पिंड अर्पित किए जाते हैं।
सभी पितरों की तृप्ति हेतु सामूहिक तर्पण संपन्न होता है।
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